जब त्वचा पर कोई असाधारण गांठ, पुराना मस्सा, गहरा कट, सिस्ट, तिल, केलॉइड (Keloid) या जलने का पुराना निशान बन जाता है, तो मरीज अक्सर भ्रमित रहते हैं कि वे किसी सामान्य डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) को दिखाएं या एक प्रशिक्षित स्किन सर्जन (Skin Surgeon) को। यदि आप गूगल पर skin surgeon in Varanasi, वाराणसी में स्किन सर्जन, या skin specialist in Varanasi खोज रहे हैं, तो यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि किसी भी प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया—चाहे वह साधारण तिल हटाना हो या गंभीर फेशियल रिकंस्ट्रक्शन—एक योग्य प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन के हाथों में ही सबसे सुरक्षित होती है।
वाराणसी, लंका, सुंदरपुर, मंडुआडीह, सिगरा और पूरे पूर्वांचल (मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर, भदोही, जौनपुर) के मरीजों के लिए स्टार हॉस्पिटल वाराणसी (Star Multispeciality Hospital, Chitaipur) में त्वचा, चेहरे और सॉफ्ट टिश्यू से जुड़ी सभी सर्जिकल समस्याओं का संपूर्ण क्लीनिकल समाधान उपलब्ध है।
यहाँ त्वचा से जुड़ी समस्त जटिल एवं एस्थेटिक सर्जरी डॉ. गौतम प्रकाश (Dr. Gautam Prakash – MBBS, MS, M.Ch Plastic Surgery, Ex-Associate Professor IMS-BHU) के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में पूरी की जाती हैं। यह विस्तृत मार्गदर्शिका आपको स्किन सर्जरी के विभिन्न प्रकारों, डर्मेटोलॉजिस्ट बनाम स्किन सर्जन के अंतर, आधुनिक तकनीकों, सावधानियों और लागत के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
गूगल सर्च और एआई ओवरव्यूज (Google AI Overviews) में यह प्रश्न सबसे अधिक पूछा जाता है कि डर्मेटोलॉजिस्ट और स्किन सर्जन में क्या अंतर है। त्वचा के उपचार को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
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│ त्वचा रोग एवं सर्जिकल समाधान │
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│ डर्मेटोलॉजिस्ट (Dermatologist) │ │ स्किन सर्जन (Skin Surgeon) │
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│ • योग्यता: MD / DNB (Dermatology) │ │ • योग्यता: MS, M.Ch (Plastic Surgery) │
│ • मुख्य कार्य: दवाइयों व लेजर से इलाज │ │ • मुख्य कार्य: चीरा, बायोप्सी, एक्सिशन │
│ • दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा, सोरायसिस │ │ • तिल, मस्सा, सिस्ट व लाइपोमा निकालना │
│ • एक्ने (मुंहासे), एलर्जी, हेयर फॉल │ │ • केलॉइड, फेशियल स्कार, स्किन कैंसर │
│ • प्राथमिक उद्देश्य: मेडिकल मैनेजमेंट │ │ • प्राथमिक उद्देश्य: सर्जिकल प्रेसिजन व │
│ │ │ न्यूनतम दाग (Aesthetic Camouflage) │
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डर्मेटोलॉजिस्ट (Dermatologist): जब समस्या त्वचा की सतह पर हो और उसका इलाज दवाओं, लोशन, केमिकल पील या बेसिक लाइट थेरेपी से संभव हो (जैसे एक्जिमा, फंगल इन्फेक्शन, पिंपल्स), तब त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया जाता है।
स्किन सर्जन (Plastic & Skin Surgeon): जब त्वचा पर किसी प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया, चीरा (incision), गांठ निकालना (excision), फ्लैप सर्जरी या त्वचा का प्रत्यारोपण (Skin Grafting) आवश्यक हो, तब एक बोर्ड-सर्टिफाइड प्लास्टिक सर्जन की आवश्यकता होती है। डॉ. गौतम प्रकाश जैसे M.Ch प्लास्टिक सर्जन त्वचा की गहरी परतों (Dermis, Subcutaneous tissue) और सूक्ष्म रक्त नलिकाओं की सुरक्षा करते हुए सर्जरी करते हैं, ताकि भविष्य में कोई विकृत निशान न छूटे।
स्टार हॉस्पिटल वाराणसी में त्वचा एवं चेहरे से जुड़ी निम्नलिखित प्रमुख सर्जिकल प्रक्रियाएं अत्याधुनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के साथ की जाती हैं:
चेहरे या शरीर के किसी भी हिस्से पर मौजूद अनचाहे तिल (Mole) या मस्से न केवल देखने में असहज लगते हैं, बल्कि कई बार घर्षण के कारण उनमें दर्द या रक्तस्राव भी होने लगता है।
सर्जिकल तकनीक: स्टार हॉस्पिटल में रेडियोफ्रीक्वेंसी (RF Ablation), इलेक्ट्रोसर्जरी और प्रिसिजन सर्जिकल शेव एक्सिशन (Shave Excision) द्वारा तिल और मस्सों को पूरी जड़ से हटाया जाता है।
दाग-रहित प्रक्रिया: चेहरे पर मौजूद तिल निकालते समय सूक्ष्म कॉस्मेटिक सूचर्स (Micro-sutures) का प्रयोग किया जाता है, जिससे उपचार के बाद सामान्य त्वचा के साथ प्राकृतिक रूप से मेल हो जाता है और किसी प्रकार का गड्ढा या निशान नहीं बनता।
त्वचा के नीचे वसा की नरम गांठ को लाइपोमा (Lipoma) और पसीने/तेल की ग्रंथि में रुकावट से बनी गांठ को सेबेसियस सिस्ट (Sebaceous Cyst) कहा जाता है।
मिनिमल इनवेसिव तकनीक: पारंपरिक सर्जरी में बड़े चीरे लगाए जाते थे, जिससे त्वचा पर बड़ा निशान रह जाता था। डॉ. गौतम प्रकाश सूक्ष्म चीरे (Minimal Incision Technique) के माध्यम से पूरी सिस्ट की थैली (Capsule) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे सिस्ट के दोबारा बनने (Recurrence) की संभावना समाप्त हो जाती है।
कान छिदवाने, जलने या किसी चोट के बाद कई लोगों की त्वचा पर अत्यधिक मात्रा में कोलेजन बनने लगता है, जिससे वह निशान फूलकर सख्त गांठ या केलॉइड का रूप ले लेता है। इसमें अक्सर खुजली और तेज चुभन होती है।
मल्टी-मॉडल अप्रोच: केलॉइड को केवल काट कर हटाना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि इसके दोबारा उभरने का खतरा 80% तक होता है। स्टार हॉस्पिटल में सर्जिकल रिडक्शन के साथ-साथ इंट्रा-लीजनल कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन (Intralesional Therapy) और सिलिकॉन जेल शीट थेरेपी का संयोजन किया जाता है, जिससे केलॉइड पूरी तरह चपटा और निष्क्रिय हो जाता है।
यदि त्वचा पर कोई तिल अचानक अपना रंग, आकार या बॉर्डर बदल रहा हो, या कोई घाव लंबे समय से न भर रहा हो, तो यह बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC), स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) या मेलेनोमा का संकेत हो सकता है।
एक्सीजनल बायोप्सी एवं मार्जिन क्लीयरेंस: प्लास्टिक सर्जन के रूप में डॉ. गौतम प्रकाश कैंसरग्रस्त हिस्से को सुरक्षित स्वस्थ मार्जिन के साथ पूरी तरह निकाल देते हैं और उसकी पैथोलॉजिकल बायोप्सी सुनिश्चित करते हैं।
लोकल फ्लैप और रिकंस्ट्रक्शन: चेहरे या नाक से ट्यूमर हटाने के बाद खाली हुई जगह को आसपास की स्वस्थ त्वचा (Local Flap) या स्किन ग्राफ्टिंग द्वारा इस तरह भरा जाता है कि चेहरे की स्वाभाविकता पूरी तरह बनी रहे।
गंभीर रूप से जलने, बिजली के करंट या भारी एक्सीडेंटल घावों के बाद जब त्वचा की सतह पूरी तरह नष्ट हो जाती है, तो उसे ठीक करने के लिए स्किन ग्राफ्टिंग आवश्यक होती है।
स्प्लिट थिकनेस (STSG) एवं फुल थिकनेस (FTSG) ग्राफ्टिंग: जांघ या शरीर के किसी छिपे हुए हिस्से से स्वस्थ त्वचा की पतली परत लेकर घाव वाले हिस्से पर प्रत्यारोपित की जाती है। इसके साथ ही, पुराने जले के कारण मुड़ी हुई उंगलियों या गर्दन के खिंचाव (Burn Contracture Release) को सर्जरी द्वारा पूरी तरह खोलकर अंगों की गतिशीलता बहाल की जाती है।
| सर्जिकल प्रक्रिया (Procedure) | मुख्य क्लीनिकल उद्देश्य | एनेस्थीसिया का प्रकार | अस्पताल में ठहराव | रिकवरी का समय |
| Mole & Skin Tag Removal | चेहरे व त्वचा से तिल/मस्सा हटाना | लोकल एनेस्थीसिया | डे-केयर (30 मिनट) | 3–5 दिन में सामान्य हीलिंग |
| Sebaceous Cyst / Lipoma | गांठ व सिस्ट को कैप्सूल सहित निकालना | लोकल एनेस्थीसिया | डे-केयर (1 घंटा) | 5–7 दिन में टांके कटना |
| Keloid Scar Revision | सख्त, उभरे हुए निशान को फ्लैट करना | लोकल एनेस्थीसिया | डे-केयर + इंजेक्शन | 2–3 सप्ताह; दीर्घकालिक निगरानी |
| Skin Grafting (बर्न/घाव) | नष्ट हुई त्वचा पर नई स्किन लगाना | रीजनल / जनरल | 2 से 4 दिन का ठहराव | 10–14 दिन ग्राफ्ट सेटलमेंट |
| Facial Scar Revision | एक्सीडेंट के निशान को प्राकृतिक स्किन लाइन में मोड़ना | लोकल एनेस्थीसिया | डे-केयर (1-2 घंटे) | 5–7 दिन टांके कटना; 3–6 महीने परिपक्वता |
त्वचा की सर्जरी में केवल डॉक्टर का अनुभव ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता और स्टेरिलाइजेशन का स्तर भी सर्वोपरि होता है। किसी भी सामान्य कमरे या गैर-मान्यता प्राप्त क्लिनिक में त्वचा पर चीरा लगवाना जानलेवा फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन को बुलावा दे सकता है।
स्टार हॉस्पिटल वाराणसी (Star Multispeciality Hospital, Chitaipur) में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं:
लैमिनार-फ्लो मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (HEPA Filters): हवा में मौजूद सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने वाली तकनीक, जिससे सर्जरी के बाद संक्रमण (Post-operative Infection) का खतरा नगण्य हो जाता है।
माइक्रो-सर्जिकल इंस्ट्रूमेंटेशन: त्वचा के बारीक से बारीक टांकों के लिए विश्वस्तरीय मैग्निफाइंग लूप्स और कॉस्मेटिक सूचर्स (Ethilon, Monocryl) का उपयोग।
पूर्णकालिक एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर: बुजुर्ग मरीजों या डायबिटिक रोगियों में सर्जरी के दौरान सुरक्षा के लिए वरिष्ठ निश्चेतना विशेषज्ञों और आईसीयू की निरंतर उपस्थिति।
सेंट्रल लोकेशन: अमरा अखरी बाईपास, चुनार रोड, इंदिरा नगर कॉलोनी, चितईपुर चौराहा के पास स्थित यह अस्पताल बीएचयू, लंका, सिगरा, ककरमत्ता, मंडुआडीह तथा रोहनिया हाईवे से सीधा जुड़ा हुआ है।
वाराणसी में त्वचा की सर्जरी का खर्च बीमारी की प्रकृति, गांठ के आकार और प्रक्रिया की तकनीक पर निर्भर करता है:
तिल, मस्सा या स्किन टैग हटाना: यदि केवल 1–2 छोटे तिल हटाने हैं, तो यह एक त्वरित ओपीडी प्रक्रिया होती है जिसका खर्च न्यूनतम होता है। यदि चेहरे पर कई तिल हैं या रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव का उपयोग हो रहा है, तो खर्च उसी अनुसार निर्धारित होता है।
सेबेसियस सिस्ट या लाइपोमा: गांठ का आकार (1 सेमी या 10 सेमी), उसकी गहराई और शरीर के स्थान (चेहरा, खोपड़ी या पीठ) पर लागत निर्भर करती है।
जटिल स्किन ग्राफ्टिंग या केलॉइड ट्रीटमेंट: इसमें अस्पताल में रुकने के दिन, ड्रेसिंग सामग्री और एनेस्थीसिया का खर्च सम्मिलित होता है।
स्टार हॉस्पिटल वाराणसी में परामर्श (OPD Consultation) के दौरान पूरी तरह पारदर्शी शुल्क बताया जाता है, ताकि मरीज को किसी भी अप्रत्याशित खर्च की चिंता न रहे।
स्टार हॉस्पिटल वाराणसी में सभी शल्य प्रक्रियाएं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के तहत पूरी की जाती हैं:
NMC (National Medical Commission): भारत सरकार के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा प्रमाणित सुपर-स्पेशियलिटी (M.Ch) नियमों का पूर्ण अनुपालन।
APSI (Association of Plastic Surgeons of India): प्लास्टिक एवं त्वचा शल्य चिकित्सा के क्लीनिकल एथिक्स और प्रोटोकॉल्स।
WHO Safe Surgery Protocol: ऑपरेशन से पूर्व मार्किंग, स्टेरिलाइजेशन और पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग के 3-चरणीय सुरक्षा नियम।
त्वचा की गांठ, सिस्ट, तिल, केलॉइड या बर्न स्कार के सटीक परामर्श के लिए संपर्क करें:
अस्पताल: स्टार हॉस्पिटल वाराणसी (Star Multispeciality Hospital)
विभाग: डिपार्टमेंट ऑफ प्लास्टिक, कॉस्मेटिक एवं स्किन सर्जरी
प्रमुख विशेषज्ञ: डॉ. गौतम प्रकाश (MBBS, MS, M.Ch Plastic Surgery)
पता: अमरा अखरी बाईपास (चुनार रोड), भारत गैस एजेंसी के पास, इंदिरा नगर कॉलोनी, चितईपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश – 221005
अपॉइंटमेंट हेल्पलाइन: +91-8090215577
आधिकारिक वेबसाइट: www.drgautamprakash.com
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Choosing the right plastic surgeon is a life-changing decision. With Dr. Gautam Prakash at Gautam Aesthetics, you’re not just choosing a surgeon—you’re choosing trust, precision, and aesthetic brilliance. Whether you’re looking for subtle enhancements or post-trauma reconstruction, we’re here to guide you every step of the way.
Conveniently located at Star Hospital Varanasi Akhri Bypass ( chunar road) Varanasi and Star Hospital, Indiranagar, Chitaipur, a well-known medical hub of Varanasi.
Safe surgical outcomes depend on thorough pre-operative assessment, transparent risk discussion, and adherence to sterile hospital protocols:
Individualized Candidate Screening: Not every procedure is clinically appropriate for every patient. Factors such as underlying cardiovascular health, uncontrolled diabetes, smoking status, body mass index (BMI), and realistic aesthetic expectations dictate whether a patient is a safe candidate for surgery.
Informed Consent & Risk Disclosure: Every invasive procedure carries inherent risks, including post-operative swelling, bruising, delayed wound healing, infection, and individual variations in scarring. A comprehensive surgical consultation must include an honest discussion of potential complications alongside expected improvements.
Super-Specialty Verification: Patients should confirm their surgeon holds recognized statutory qualifications (M.Ch or DNB in Plastic Surgery accredited by the National Medical Commission) before scheduling any invasive or minimally invasive procedure.
Institutional Operating Standards: For patient safety, all surgical interventions requiring sedation or general anesthesia should take place inside an accredited hospital facility equipped with dedicated intensive care backup, full-time anesthesiologists, and standardized sterile environments.
Adherence to Post-Operative Directives: Recovery timelines, scar maturation, and long-term results depend heavily on patient compliance with post-operative instructions, including the continuous use of prescribed compression garments, proper wound care, and scheduled follow-up evaluations.
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